हमारा लक्ष्य

वेद का छठा अंग ज्योतिष है , सूर्य-चंद्रमा ही पिता और माता है । वेदों के सर्वांगीण अनुशीलन के लिये शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष- इन ६ अंगों के ग्रन्थ हैं। प्रतिपदसूत्र, अनुपद, छन्दोभाषा (प्रातिशाख्य), धर्मशास्त्र, न्याय तथा वैशेषिक- ये ६ उपांग ग्रन्थ भी उपलब्ध है। आयुर्वेद, धनुर्वेद, गान्धर्ववेद तथा स्थापत्यवेद- ये क्रमशः चारों वेदों के उपवेद कात्यायन ने बतलाये हैं। विज्ञान जहां समाप्त होता है, वहां से ज्योतिष शुरू होता है, यह वेद सम्मत विज्ञान है। ज्योतिष लोगों को अंधविश्वास की ओर नहीं ले जाता, बल्कि लोगों को जागरूक करता है। ज्योतिष समय का विज्ञान है, इसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और कर्म इन पांच चीजों का अध्ययन कर भविष्य में होने वाली घटनाओं की जानकारी दी जाती है। यह किसी जाति या धर्म को नहीं मानता। वेद भगवान भी ज्योतिष के बिना नहीं चलते। वेद के छः अंग हैं, जिसमें छठा अंग ज्योतिष है। हमने पूर्व जन्म में क्या किया और वर्तमान में क्या कर रहे हैं, इसके आधार पर भविष्य में क्या परिणाम हो सकते हैं, इसकी जानकारी ज्योतिष के द्वारा दी जाती है। ग्रहों से ही सब कुछ संचालित होते हैं। इसी से ऋतुएं भी बनती हैं। सूर्य पृथ्वी से दूर गया तो ठंड का मौसम आ गया और पास आने पर गर्मी बढ़ गई। सूर्य आत्मा के रूप में विराजमान हैं, परिवार में इसे पिता का स्थान प्राप्त है। इसी तरह चंद्रमा मन पर विराजमान रहता है, परिवार में इसे मां का दर्जा प्राप्त है। इसलिए जिस व्यक्ति ने मां-पिता का आशीर्वाद प्राप्त कर लिया समझो वह सूर्य और चंद्रमा का आशीर्वाद प्राप्त कर लिया। मंगल शरीर की ऊर्जा है, शरीर में पर्याप्त ऊर्जा है तो आपकी सक्रियता दिखेगी। जिस व्यक्ति के मन में ईर्ष्या नहीं है समझिए, उसका बुध मजबूत है, उसे बुध का आर्शीवाद प्राप्त है। इसी तरह शुक्र परिवार में पत्नी की तरह और शरीर में शुक्राणु के रूप में मौजूद रहता है। जिस व्यक्ति का स्नायु तंत्र कमजोर है, नसें कमजोर हैं, स्पाईन का दर्द है समझो उसके ऊपर शनिदेव का प्रकोप है। वेदों में कर्मकाण्ड, उपासना और ज्ञान तीन काण्ड बतलाये गए हैं । ‘ज्योतिष्टोमेन यजेत्‍’ यह कर्मकाण्ड है, ‘सूर्यो ब्रह्मेत्युपासीत’ यह उपासना है, ये दोनों काण्ड ज्ञान के साधन हैं हैं ‘अयमात्मा ब्रह्म’ यह ज्ञान है जो स्वयं में साध्य है । यही उक्त दोनों में ही वेदोक्त मार्ग के अनुसार प्रवृत्त होना चाहिए । देवता की उपासना से अन्तःकरण शुद्ध हो जाता है । जिससे उत्तम ज्ञान की प्राप्ति होती है । कार्यकारणसंघात शरीर में प्रविष्ट हुआ जीव ही परब्रह्म है । इसी ज्ञान से साधक मुक्त हो जाता है । अतः मनुष्य देह प्राप्त कर देवताओम की उपासना से मुक्ति प्राप्त कर लेनी चाहिए । जो मनुष्य देह प्राप्त कर संसार बन्धन से मुक्त नही होता, वही महापापी ॥इसलिए उपासना और कर्म से काम-क्रोधादि शत्रुओं का नाश कर आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए सत्पुरुषों को सतत्‍ प्रयत्न करते रहना चाहिए ॥जो व्यक्ति इस प्रकार धर्माचरण करते हुये त्रिकाल देव पूजन करता है वह कभी भी शत्रुओं एवं दुःखों से पीडित नहीं होता उसके इष्टदेव स्वयम उसकी रक्षा करते है ॥क्योंकि देवपूजा न करने पर नरक की प्राप्ति होती है अतः व्यक्ति को देवता के प्रति आस्था एवं श्रद्धा रख कर देव पूजन ही चाहिए ॥ ॐ रां रामाय नम: श्रीराम ज्योतिष सदन, पंडित आशु बहुगुणा, संपर्क सूत्र- 9760924411

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पंडित आशु बहुगुण के बारे में

ॐ श्री रां रामाय नमः श्री राम ज्योतिष सदन भारतीय वैदिक ज्योतिष मानव को बेहतर जीवन और भविष्य के लिए मदद करता है। जीवन की विभिन्न समस्याओं के समाधान लिए हमे अपनी जन्म कुंडली के माध्यम से समाधान कराना होगा। जन्मकुंडली हमारे भूत भविष्य वर्तमान के बारे में बताता है। और बेहतर भविष्य के लिए मार्गदर्शन करता है। और हमारी समस्याओं का समाधान करता है| जन्म कुंडली को दिखाने के लिए हमे जन्म की तारीख, जन्म का समय, जन्म का स्थान, विवरण की आवश्यकता होती है। जातक ने पूर्व जन्म में जैसा भी शुभाशुभ कर्म किया है| उसका फल कब और कैसे प्राप्त होगा ? भारतीय ज्योतिष का फलित स्कन्ध यही विवरण प्रस्तुत करता है| मानव के कर्मफल के परिपाक समय का ज्ञान प्राप्त करने के लिए मनीषियों ने भारतीय ज्योतिष में दशा पद्धति का आविष्कार किया, जिससे कि यह जाना जा सके कि अमुक ग्रह का शुभाशुभ फल कब मिलेगा| इसका निर्धारण दशा पद्धति करती है | कब और कैसा फल मिलेगा यह ग्रह कि स्थिति पर निर्भर करता है| भविष्य अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए है | यही वजह है| कि हम सब अपने भविष्य के बारे जानने के लिय उत्सुक हैं | सभी समस्या का समाधान वैदिक विधियों द्वारा समस्याओं का समाधान | जन्म कुंडली के द्वारा , विद्या, कारोबार, विवाह, संतान सुख, विदेश-यात्रा, लाभ-हानि, गृह-क्लेश , गुप्त- शत्रु , कर्ज से मुक्ति, सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक .व्यापार नौकरी. प्यार जीवन साथी. धन लाभ. आर्थिक संपन्नता संतान की चिंता.शिक्षा, पारिवारिक अशांति और के बारे में क्या अच्छा होगा ,क्या बुरा होगा होगा ,मेरा अच्छा समय कब आएगा अन्य व्यक्तिगत समस्या है| यह जानना सबके लिए काफी रोचक होता हैं| इन प्रश्नों के उत्तर जन्म कुंडली से आसानी दिए जा सकते || ॐ श्री रां रामाय नमः श्री राम ज्योतिष सदन भारतीय ज्योतिष, अंक ज्योतिष पर आधारित जन्मपत्रिका और वर्षफल बनवाने के लिए सम्पर्क करें। अगर आप व्यक्तिगत रूप से या फोन पर एस्ट्रोलॉजर पंडित आशु बहुगुणा से अपनी समस्याओं को लेकर बात करना चाहते हैं। अपनी नई जन्मपत्रिका बनवाना चाहते हैं। या अपनी जन्मपत्रिका दिखाकर उचित सलाह चाहते हैं। मेरे द्वारा निर्धारित फीस/शुल्क अदा कर के आप बात कर सकते हैं। मोबाइल नं-9760924411 फीस संबंधी जानकारी के लिए में आप Whatsapp message भी कर सकते हैं। कृपया निशुल्क:- भारतीय ज्योतिष, अंक ज्योतिष परामर्श संबंधी फोन अथवा मैसेज करें। मुजफ्फरनगर UP PROVIDE YOUR DETAILS • Name/Gender • Birth Date • Birth Time • Birth Place • Query..

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