मेष लग्न केजातकशारीरिकरूपसेकुछगोलाईलिएहुएहोतेहैं।अधिकांशतःदेखागयाहैकिमेषलग्नमेंजन्मेजातकअपनीउम्रसेकमनज़रआतेहैं।मेषलग्नकेजातकस्वभावसेउग्रपरन्तुशीघ्रहीदूसरोंपरप्रसन्नहोजातेहैं।प्रकृतिसेभ्रमणशीलपरन्तुघुटनोंसेरोगग्रस्तहोतेहैं।आपअत्यधिकक्रोधीतथाअपनाकार्यचतुरतासेनिकलवानेमेंनिपुणहोतेहैं।किसीभीविषयपरवाद-विवादकरनेसेआपनहींहिचकिचातेहैं।मेषलग्नकेजातकदूसरोंकेसमक्षअनावश्यकदिखावाकरनेमेंभीनहीं हिचकिचाते हैं।
मेष लग्न केजातकसाहसीतथाअभिमानीहोतेहैं।अपनेसेकीगयीविपरीतबातकोमेषलग्नकेजातककतईपसंदनहींकरते।ऐसेजातकजलसेभयखानेवाले, अल्पभोजी, वायावरएवंचपलहोतेहैं।अपनेपरिश्रमीतथापराक्रमीस्वभावकेकारणमेषलग्नकेजातकअपनेजीवनमेंमनवांछितमान-सम्मानएवंप्रतिष्ठापातेहैं।आपमेंस्वाभिमानकीभावनाकूट-कूटकरभरीहोतीहै, इसलिएकहींभीजानेपरआपउचितसम्मानकीलालसा रखते हैं।
मेष लग्न मेंजन्मलेनेवालेजातकप्रायःघुमन्तुकिस्मकेव्यवसायकरतेहैं।उदाहरणार्थ- फेरीलगानेवाले, ट्रेवलिंग, सेल्समेनआदि।धार्मिकविचारोंमेंमेषलग्नकेजातकोंकादृष्टिकोणभिन्नहोताहै।आपशक्तिकेउपासकहोतेहै।अपनीबातकेधनीएवंशर्तकेकट्टरहोतेहैं।मेषलग्नकेजातकप्रायःकिसीझगडेमेंपड़नानहींचाहतेहैंपरन्तुयदिकोईभीबातइनकोपसंदनाआएतोसामनेवालेकोसबकसिखायेबिना नहीं मानते।
प्रकाश फ़ैलाने वालासूर्यपंचमभावकास्वामी (पंचमेश) होताहै।जातककेबुद्धि, आत्मा, स्मरणशक्ति, विद्याग्रहणकरनेकीशक्ति, नीति, आत्मविश्वास, प्रबंधव्यवस्था, देवभक्ति, देशभक्ति, नौकरीकात्याग, धनमिलनेकेउपाय, अनायसधनप्राप्ति, जुआ, लाटरी, सट्टा, जठराग्नि, पुत्रसंतान, मंत्रद्वारापूजा, व्रतउपवास, हाथकायश, कुक्षी, स्वाभिमान, अहंकारकोअभिव्यक्तकरताहै।जन्मकुंडलीयादशाकालमेंसूर्यकीअच्छीबुरीस्थितिअनुसारहीइनफ़लोंकीन्यूनाधिकतारहतीहै।भलिभांतिसूर्यकीस्थितिकाअध्ययनकरकेइनबातोंकाजातककितनालाभलेसकेगा, यहपतालगताहै।सूर्यबलीहोतोअच्छेफ़लोंमेंवृद्धिहोतीहैऔरकमजोरसुर्यइनफ़लोंमेंकमीउत्पन्न करता है।
मेष लग्न मेंमंगलग्रह का प्रभाव
मंगल प्रथम औरअष्ठमभावकास्वामीहोताहै।यहलग्नेशहोनेकेनातेजातककेरूप, चिन्ह, जाति, शरीर, आयु, सुखदुख, विवेक, मष्तिष्क, व्यक्तिकास्वभाव, आकृतिऔरसंपूर्णव्यक्तित्वकाप्रतिनिधिहोताहै।मेषलग्नमेंअगरमंगलबलशालीहोतोसमस्तकुंडलीमेंशुभफ़लअधिकप्राप्तहोतेहैं, बलवानऔरशुभमंगलफ़लोंमेंवॄद्धिकारकहोताहैजबकिकमजोरमंगलइनफ़लोंमेंन्यूनतापैदा करता है।
लग्नेश के साथसाथमेषलग्नमेंमंगलअष्टभावकाप्रतिनिधियानिअष्टमेशभीहोताहै।अष्टमेशहोनेनातेमंगल, व्याधि, जीवन, आयु, मॄत्युकाकारण, मानसिकचिंता, समुद्रयात्रा, नास्तिकविचारधारा, ससुराल, दुर्भाग्य, दरिद्रता, आलस्य, गुह्यस्थान, जेलयात्रा, अस्पताल, चीरफ़ाडआपरेशन, भूतप्रेत, जादूटोना, जीवनकेभीषणदारूणदुखइत्यादिकाभीप्रतिनिधिहै।इनसमस्तफ़लोंकेबारेमेंमंगलकीस्थितिकाअध्ययनकरकेहीजानाजासकताहै।मेषलग्नमेंमंगललग्नेशहोकरअष्टमेशहैइसलियेउसेअष्टमेशहोनेकादोषीनहीमानाजाता, अगरमंगलशुभऔरबलिहोतोमेषलग्नमेंशुभफ़लोंकीअतिशयवॄद्धिहीकरताहै।अशुभअथवानीच, कमजोरहोनेसेकिंचितअशुभफ़लभीप्रदान करता है।
मेष लग्न मेंशुक्रग्रह का प्रभाव
शुक्र द्वितीय औरसप्तमभावकास्वामीहोताहै, यहांशुक्रकीस्थितिकाभलिभांतिअध्ययनकरलेनाचाहिये।क्योंकिशुक्रयहांद्वितियेशहोनेकेनातेधनऔरकुटुंबकाप्रतिनिधिहैऔरसप्तमेषहोनेसेजीवनकेएकप्रमुखभावयानिविवाहकाभी प्रतिनिधि है।
राहु षष्ठ भावकाअधिपतियानिषष्ठेशहोताहै।रोग, ऋण, शत्रु, अपमान, चिंता, शंका, पीडा, ननिहाल, असत्यभाषण, योगाभ्यास, जमींदारीवणिकवॄति, साहुकारी, वकालत, व्यसन, ज्ञान, कोईभीअच्छाबुराव्यसनइत्यादिकेफ़लोंकादायित्वराहुपरहोताहै।अगरराहुशुभप्रभावयुक्तहोतोशुभफ़लप्राप्तहोतेहैंऔरअशुभप्रभाववालेराहुकीवजहसेअशुभफ़लप्राप्त होते हैं।
मेष लग्न मेंकेतुग्रह का प्रभाव
केतु बारहवें भावकाअधिपतियानिद्वादशेशहोताहै।निद्रा, यात्रा, हानि, दान, व्यय, दंड, मूर्छा, कुत्ता, मछली, मोक्ष, विदेशयात्रा, भोगऐश्वर्य, लम्पटगिरी, परस्त्रीगमन, व्यर्थभ्रमणइत्यादिविषयोंकादायित्वकेतुपरहोताहै।अगरकेतुशुभप्रभावयुक्तहोतोअत्यंतशुभप्राप्तहोतेहैंऔरअशुभऔरपापप्रभावयुक्तकेतुकेअतिशयअशुभफ़लप्राप्त होते हैं।
स्मरण रहे कियुंतोजन्मकुंडलीकेसभीग्रहअपनीशुभताअशुभताकाफ़लजीवनपर्यन्तहीदेतेरहतेहैंकिंतुअपनीदशाअंतर्दशामेंसंपूर्णरूपसेप्रभावीहोकरशुभअशुभफ़लोंकेदाता बनते हैं।
मेष लग्न मेंग्रहों का फल
मेष लग्न मेंमंगलग्रह का फल
मेष लग्न कीकुंडलीमेंमंगल1, (लग्न) भावकास्वामीतथा8, भावकास्वामीहैक्यूँकिमंगलकीदोराशियाँहोतीहैं– मेषराशि (१) तथावृश्चिकराशि (8). लग्नभावकास्वामीहोनेकेकारणयहकुंडलीकासबसेपहलायोगकारकग्रहमानाजाता है .
यदि मंगल देवजन्मलग्नकुंडलीके 3, 4, (नीचराशि6, 8, तथा12, भावमेंबैठेहैंतोमंगलदेवअपनेबलाबलकेअनुसारअशुभफलदेंगेक्योँकियहांवहगलतभावमेंपड़ेहोनेकेकारणअपनीयोगकारकताखोदेते हैं .
यदि मंगल देवजन्मलग्नकुंडलीके1, 2, 4, 5, 7, 9, 10, तथा11, भावमेंपड़ेहैंतोमंगलदेवअपनीक्षमतानुसारअपनीदशा/अंतरमेंशुभफलदेते हैं .
यदि मंगल 3, 4, (नीचका), 6, 8, तथा12, भावमेंपड़ेहैंतोउसकादानवपाठकरकेउनकीअशभताकोकमकियाजासकता है .
इस लग्न कुंडलीमेंमंगलविपरीतराजयोगमेंनहींआतेक्योँकिवहलग्नेशभीहै. विपरीतराजयोगकेलिएलग्नेशकाशुभवबलिहोनाअनिवार्य है .
मेष लग्न मेंशुक्रग्रह का फल
मेष लग्न कीकुंडलीमें2, तथा7, भावकास्वामीशुक्रदेवमानेजातेहैं. क्यूँकिशुक्रदेवकीदोराशियाँहोतीहैं– वृषराशि (2) तथातुलाराशि (7) जोकिकुंडलीकेदूसरेतथासातवेंभावमेंलिखी हैं I
अष्ठम से अष्ठमथ्योरीअनुसारशुक्रदेवइसलग्नकुंडलीमेंमारकग्रहबनते हैं .
इस लग्न कुंडलीकामारकग्रहहोनेकेकारणशुक्रकिसीभीभावमेंपड़ाहोअपनीदशा-अन्तरामेंअपनीक्षमतानुसारअशुभफल देगा .
शुक्र यदि 2, और 7, भाव (स्वःराशि) मेंबैठाहोतोयहग्रहसिर्फअपनेभावोकेलिएशुभहोता है .
इस लग्न कुंडलीमेंशुक्रकारत्नहीरावओपलकभीभीधारणनहींकियाजाताहैक्योँकिशुक्रइसकुंडलीकामारकग्रह है .
मेष लग्न वालेजातकशुक्रकीदशा/ अंतर्दशामेंशुक्रकादानकरसकतेहैंजिससेशुक्रकामारकेत्वयाअशुभफलकमहोजाता है .
मेष लग्न मेंबुधग्रह का फल
मेष लग्न कीकुंडलीमें3, तथा6, भावकास्वामीबुधदेवतामानेजातेहैं. जोकीइसलग्नकुंडलीमेंअतिमारकग्रह हैं .
इस लग्न कुंडलीमेंबुधअतिमारकग्रहहोताहैइसलिएयहकिसीभीभावमेंसदाअपनीक्षमतानुसारअशुभफलदेता है .
बुध यदि 6, तथा8, भावमेंविपरीतराजयोगकीस्थितिमेंआजाएतोशुभफलदायकभीहोसकताहै. परन्तुइसकेलिएमंगलकाशुभहोनाअनिवार्य है .
बुध ग्रह कारत्नपन्ना, मेषलग्नवालेजातककोकिसीभीकीमतपरनहींपहननाचाहिएक्योँकिवहइसकुंडलीकारोगेष है .
जब भी जातककीबुधकीदशा-अन्तराचलतीहैतीसरातथाछठाभावसक्रीयहोजाताहैसाथमेंबुधदेवजहाँबैठेहैजहाँदेखरहेहैउसभावकोभीसक्रीयकरदेतेहैI बुधदेवताइसकुंडलीमेंशत्रुगृहहैइसलिएतीसरेभावसेफिजूलकीमेहनत, मित्रोंसेमनमुटाव, कठिनपरिश्रम, छोटेभाई/बहिनोकोदिक्कतपरेशानीबड़ादेतेहैतथाछठेभावसेरोग (त्वचासेसम्बंधित), कर्जा, शत्रु, लड़ाईझगड़ा, मानसिकतनाव, दुर्घटनाकेयोग, चोटलगना, कोर्टकेसजैसेहालतसक्रीयकरदेतेहैं. साथहीसाथजहाँबैठेहोंगेउसभावसेसम्बन्धितपरेशानीभीसक्रीयकरदेते हैं .
इस लग्न कीकुंडलियोंमेंसदाहीबुधदेवताकेदानकियेजाते हैं .
मेष लग्न मेंचंद्रग्रह का फल
चंद्र देव इसलग्नकुंडलीमें4, भावकेस्वामीहोनेकेकारणएकयोगकारकग्रहमानेजाते हैं .
3, 6, 8, तथा 12, भावमेंचंद्रदेवउदयअवस्थामेंअपनीक्षमतानुसारअशुभफलदेतेहैं. क्यूँकिइनभावोंमेंबैठकरचंद्रदेवताअशुभहोजातेहैंऔरशत्रुग्रहकीभाँतिफलदेतेहैं, जिसतरहएकसाधुसंतशराबकेठेकेपरजाकरबैठेतोहउसेअशुभमानाजाताहैक्यूँकिसमाजकाकोईभीजातकउससाधुकोअच्छानहींसमझेगाऐसेसाधुकोऔरपैसेमिलेंगेतोहवहसाधुऔरज्यादागलतहरकतकरेगाI इसलिएइनभावों 3, 6, 8, तथा 12, मेंबैठेचंद्रदेवताकामोतीभूलकरभीधारणनकरेंक्यूँकिमोतीधारणकरनेसेशरीरमेंउसकाअशुभप्रभावऔरअधिकबढ़जायेगाजिससेआपकीपरेशानियोंमें3-4 गुनावृद्धिहो जाएगी I
अस्त अवस्था मेंचन्द्रमाइसलग्नकुंडलीमेंकिसीभीभावमेंपड़ाहोतोउसकारत्न, मोतीधारणकियाजाना चाहिए .
यदि चन्द्रमा 3, 6, 8, तथा 12, भावमेंउदयअवस्थामेहोतोउसकीअशुभताकोकमकरनेकेलिएउसकेदानकरनेचाहिए. उसकारत्नकभीभीधारणनहींकरना चाहिए .
सूर्य देव इसलग्नकुंडलीमेंपंचमेश (पांचवेंभावकेस्वामी) हैंइसलिएसूर्यदेवइसकुंडलीमेंयोगकारक हैं .
तीसरे, छठे, सातवें, आठवेंऔरबारहवेंभावमेंसूर्यदेवअशुभफलदेते हैं .
तीसरे, छठे,आठवें, सातवें (नीचराशि ) औरबारहवेंभावमेंजबसूर्यपड़ाहैतोउसकेदानकरकेऔरसूरजकोजलदेकरउसकीअशुभताकोकमकियाजाता है .
यदि शुभ घरोमेंसूर्यदेवपड़ेहोऔरउनकाबलकमहैअर्थातबलहीनहैतोउनकारत्नमाणिकपहनकरउनकाबलबढ़ायाजाता है .
पहले, दूसरे, चौथे, पांचवें, नवम, दशम, औरएकादशभावमेंस्थितसूर्यदेवअपनीदशा– अंतर्दशामेंअपनेबलकेअनुशारशुभफलदेते हैं .
मेष लग्न मेंबृहस्पतिग्रह का फल
बृहस्पति इस लग्नकुंडलीमेंनौवेंतथा12, वेंभावकेस्वामीहै. इसलिएभाग्येशहैंऔरयोगकारकग्रहमानेजाते हैं .
बृहस्पति यदि इसलग्नकुंडलीमेंतीसरे, छठें, आठवें, दसवेंऔरबारहवेंभावमेंहैंतोवहअशुभहोतेंहैं. इनघरोमेंपड़ेहोनेकेकारणबृहस्पतिकेदानकरकेउनकीअशुभताकोदूरकियाजाताहै. दसवेंभावमेंवोअपनीनीचराशिमेंहोते हैं .
इस लग्न कुंडलीमेंबृहस्पतियदिछठें, आठवेंव12 वेंमेंबैठेंहैंऔरविपरीतराजयोगमेंहैंतोशुभफलदेंगे. परन्तुइसकेलिएलग्नेशमंगलकाशुभवबलिहोनाअनिवार्य है .
यदि बृहस्पति देवतासूर्यकेसाथ11, सेकमअन्तरमेंबैठेहैंतोबृहस्पतिदेवताअस्तहोजातेहैं।अस्तअवस्थामेंबृहस्पतिकुंडलीकेकिसीभीभावमेंबैठेहैंतोउनकारत्न “पुखराज” अवश्यधारणकरेंI अस्तहोनेकीवजहसेग्रहकीकिरणेंहमारेशरीरपरनहींपड़तीहैंइसलिएयोगकारकग्रहकोअशुभनहींमानाजाताहै (अस्तअवस्था में) .
केतु ग्रह कीअपनीकोईराशिनहींहोतीहै. अपनेमित्रकीराशिवशुभभावमेंवहशुभफलदेते हैं .
इस कुंडली मेंपहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवें, छठे, आठवें, और12 वेंभावमेंमारकहोते हैं .
सातवें और नौवें, दसवेंव11 वेंभावमेंवेंअच्छाफलदेंगे. नौवेंभावमेंउनकीउच्चराशिहोतीहैंऔरवहअपनीक्षमताअनुसारफल देंगे .
केतु का रत्नलहसुनियाकभीभीकिसीजातककोनहींपहनना चाहिए .
मेष लग्न में धन योग
मेष लग्न मेंजन्मलेनेवालेजातकोंकेलिएधनप्रदाताग्रहशुक्रहै।धनेशशुक्रकीशुभाशुभस्थितिसे, धनस्थानसेसंबंधजोड़नेवालेग्रहकीस्थितिसेएवंधनस्थानपरपड़नेवालेग्रहोंकीदृष्टिसंबंधसेजातककीआर्थिकस्थिति, आयकेस्रोततथाचल-अचलसंपत्तिकापताचलताहै।इसकेअलावाभाग्येशबृहस्पतिएवंलग्नेशमंगलकीअनुकूलस्थितियांमेषलग्नवालोंकेलिएधन, एश्वर्यववैभवकोबढ़ानेमैंसहयोगकरतीहैं।वैसेमेषलग्नकेलिएशनि, बुधऔरशुक्रअशुभफलदायीहोतेहैं।गुरुवरविशुभफलदायी होते हैं।
शुभ युति – शनि + गुरु अशुभयुति– मंगल + बुध राजयोगकारक– रवि, गुरु, चन्द्र
मेष लग्न मेंबृहस्पतिकर्कराशियाधनुराशिमेंहोतोजातकअल्पप्रयत्नसेहीखूबधनकमाताहै।धनकेमामलेमेंऐसाव्यक्तिभाग्यशाली कहलाता है।
मेष लग्न मेंशुक्रवृष, तुलायामीनराशिकाहोतोव्यक्तिधनाध्यक्षहोताहै।जीवनभरलक्ष्मीजीउसकासाथ नहीं छोड़ती।
मेष लग्न मेंमंगलएवंशुक्रपरस्परस्थानपरिवर्तनकरकेबैठेहोअर्थातमंगलवृषयातुलाराशिमेंहोतथाशुक्रमेषयावृश्चिकराशिमेंहोतोजातकस्वयंकेपुरुषार्थसेधनवान बनता है।
मेष लग्न मेंशुक्रएवंशनिपरस्परस्थानपरिवर्तनकरकेबैठेहोतोऐसाव्यक्तिमहाभाग्यशाली होता है।
मेष लग्न मेंसूर्यसिंहकापंचमभावमेंहोतथालाभस्थानमेंकुंभकागुरुहोतोजातकमहाधनी होता है।
मेष लग्न मेंमंगल, शनि, शुक्रऔरबुधइनचारग्रहोंकीयुतिहोतोजातकअतिधनवान होता है।
मेष लग्न मेंसूर्यपंचममेंहोलाभभावमेंशनि, चंद्रमायागुरुमेंसेकोईभीग्रहहोतोव्यक्तिमहालक्ष्मीवान होता है।
मेष लग्न मेंमंगलयदिसूर्य, शुक्रऔरचंद्रमासेयुतयादृष्टहोतोव्यक्तिमहाधनीएवंभाग्यशाली होता है।
मेष लग्न मेंमंगल, शुक्र, गुरुतथाशनिअपनीअपनीउच्चराशियास्वराशिमेंहोतोजातककरोड़पति होता है।
मेष लग्न मेंमंगलदशमभावमेंभाग्येशशनिपांचवेभावमेंहोतोजातकलक्षाधिपति बनता है।
मेष लग्न मेंशुक्रआठवेंभावमेंहोऔरसूर्ययदिलग्नभावकोदेखताहो, तोऐसेव्यक्तिकोभूमिमेंगड़ेहुएधनकीप्राप्तिहोतीहैअथवालाटरीसेरुपयामिल सकता है।
मेष लग्न मेंचन्द्रसेगुरुकेन्द्रस्थहोअर्थात (1,4,7,10) वेभावमेंहोतोजातकधनएवंभूमिकास्वामी होता है।
मेष राशि लग्नकीकुंडलीमेंसूर्यस्वराशिकाहोएवंगुरुचंद्रकीयुतिग्यारहवेभावमेंहोतोजातकअतिलक्ष्मीवान होता है।
मेष लग्न मेंलग्नेशमंगलत्रिकोणभावमेंहोअर्थात (5,9) भावमेंहोतथाशुक्रग्यारहवेभावमेंहोतोलक्ष्मीयोग होता है।
मेष लग्न मेंलग्नस्तशुक्रहोऔरउसेसभीशुभग्रहदेखतेहोतोगजपतियोगबनताहै।ऐसाजातकमहापराक्रमी, धनवान, गुणवानएवंप्रभावशाली होता है।
मेष लग्न मेंदूसरेघरकास्वामीशुक्रपंचमभावमेंएवंपांचवेभावकास्वामीसूर्यदूसरेभावमेंहोतोऐसाजातकविशेषधनवान होता है।
मेष लग्न मेंसुखेशचंद्रमावलाभेशशनियदिनवमस्थानमेंहोतथानवमभावमंगलसेदृष्टहोतोव्यक्तिकोअनायासगुप्तधनकीप्राप्ति होती है।
मेष लग्न मेंधनेशशुक्रअष्टमभावमेंएवंअष्टमेशमंगलधनस्थानमेंपरस्परस्थानपरिवर्तनकरकेबैठेहोतोऐसाजातकगलततरीकेजैसे- जुआ, सट्टासेधन कमाता है।
मेष लग्न में रत्न
रत्न कभी भीराशिकेअनुसारनहींपहननाचाहिए, रत्नकभीभीलग्न, दशा, महादशाकेअनुसारही पहनना चाहिए।
लग्न के अनुसारमेषलग्नमैंजातकमूंगा, मोती, माणिक, औरपुखराजरत्नधारणकर सकते है।
लग्न के अनुसारमेषलग्नमैंजातककोहीरा, पन्नायानीलमरत्नकभीभीधारणनहीं करना चाहिए।
मूंगा धारण करनेसेपहले – मूंगेकीअंगूठीयालॉकेटकोगंगाजलसेअथवाशुद्धजलसेस्नानकराकरमंत्रकाजापकरकेधारण करना चाहिए।
कौनसी उंगली मेंमूंगाधारणकरें – मूंगेकीअंगूठीकोअनामिकाउंगलीमेंधारण करना चाहिए।
मूंगा कब धारणकरें – मूंगाकोमंगलवारकेदिन, मंगलकेहोरेमें, मंगलपुष्यनक्षत्रकोयामंगलकेनक्षत्रमृगशिरानक्षत्र, चित्रानक्षत्रयाधनिष्ठानक्षत्रमेंधारणकर सकते है।
कौनसे धातु मेंमूंगाधारणकरें – मूंगारत्नतांबा, पंचधातुयासोनेमेधारणकर सकते है।
मूंगा धारण करनेकामंत्र – ॐभौंभौमायनमः।इसमंत्रकाजाप108 बार करना चाहिए।
ध्यान रखे मूंगाधारणकरतेसमयराहुकाल ना हो।
CONSU.TATIONS BY ASTRO.OGER - PANDIT ASHU BAHUGUNA